Om Durgaye Nmh

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Tuesday, 24 April 2012

Monday, 23 April 2012

एक औरत कहाँ तक गिर सकती है ।

एक औरत कहाँ तक गिर सकती है ।

विधवा बहू के कारनामें से चौंक गए ससुर जी, उड़ गए होश!

रायपुर। पति की मृत्यु के बाद दूसरी शादी करने वाली युवती ने मृत पति के पिता का मकान हड़पने के लिए फर्जी दस्तावेज बनवाए और संपत्ति अपने नाम करवा ली। पुलिस से शिकायत के बाद गड़बड़ी सामने आ गई। पुलिस ने आरोपी बहू के खिलाफ चारसौबीसी का केस दर्ज कर लिया है।

आरोपी सुषमा निर्मलकर के पति की मौत कुछ वर्ष पहले हो चुकी है। इसके बाद उसने दूसरा विवाह कर लिया। दूसरी शादी के बाद उसके दो बच्चे हुए। सुषमा का पहला ससुराल गुढ़ियारी में था। उसने उसी मकान को हड़पने की योजना बनायी। वह इस कोशिश में कामयाब हो गई। फर्जी दस्तावेज बनाकर मकान अपने नाम पर करवा लिया। बाद में नगर निगम में नामांतरण करवाने की अर्जी दी। इसके लिए भी उसने फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए।
 
उसके पहले पति की बहन उमा देवी निमर्लकर को इस बात की खबर हो गई। जब उसने इसकी चर्चा घर वालों से की तो बहु के इस कारनामें से ससुराल के लोग चौंक गए. उसने एसएसपी दिपांशु काबरा से मिलकर पूरे हालात की जानकारी दी। उन्होंने इस बात को गंभीरता से लिया और गोलबाजार थाने को निर्देश दिए। पुलिस ने परीक्षण के बाद अपराध पंजीबद्ध कर लिया। इस मामले में सुषमा के दूसरे पति की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

इलाहाबाद उच्च न्यायलय की एक महत्वपूर्ण पहल ।

इलाहाबाद उच्च न्यायलय की एक महत्वपूर्ण पहल ।

ARUN KUMAR

Sep 29, 2011  -  Public
 हाल ही में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक गंभीर पहल करते हुए कहा कि यदि किसी मामले में पति, उसके परिवार वाले या अन्य रिश्तेदार निचली अदालत में पेश किए जाएं, तो अदालत उन्हें तत्काल अंतरिम जमानत पर रिहा कर दे और मामले को मीडिएशन सेंटर भेजें, क्योंकि पति-पत्नी के छोटे-मोटे झगड़े अदालत की दहलीज पर पहुंचकर उनके रिश्ते में नासूर बन जाते हैं। उच्च न्यायालय की यह पहल महत्वपूर्ण है, क्योंकि बीते वर्षों में नगर संस्कृति ने वैवाहिक रिश्तों के स्वरूप को बदल दिया है। जीवन की आपाधापी में तिल का ताड़ बन जाने वाले घरेलू मुद्दे अदालतों के चक्कर काटते दिखाई दे रहे हैं।

सामाजिक व नैतिक मूल्यों में आए बदलाव के चलते ‘प्यार’ और ‘विवाह’ की परिभाषा बदल गई है। विवाह अब ‘दायित्व’ के निर्वहन का नाम नहीं, बल्कि अधिकारों की प्राप्ति का युद्धक्षेत्र बनता जा रहा है। चिंतनीय प्रश्न यह है कि क्यों वैवाहिक संबंधों में बदला लेने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। विवाह ऐसा बंधन है, जहां स्त्री और पुरुष कुछ रस्में पूरी कर जीवन भर साथ रहने का वचन लेते-देते हैं, परंतु जरूरी नहीं कि जीवनपर्यंत, जीवन में सहजता और सरसता बनी रहे। कभी-कभी अहं का टकराव और वैवाहिक मतभेद संबंधों में खटास पैदा कर देते हैं। स्थिति तब अधिक घातक हो जाती है, जब किसी एक को अपना अस्तित्व खोता नजर आए, जिसकी प्रतिक्रिया कभी-कभी मिथ्या आरोप गढ़कर रिश्तों को नीचा दिखाने की चाह में सलाखों के पीछे पहुंचाने तक की हो जाती है। केवल बयान पर ही ससुराल पक्ष के सभी आरोपियों को जेल भेजे जाने की व्यवस्था ने कानून के नाजायज इस्तेमाल को बढ़ा दिया है। इस बढ़ती प्रवृत्ति पर दिल्ली की एक अदालत ने भी पिछले दिनों चिंता जताई थी। ‘सेव फैमिली फाउंडेशन’ और ‘माई नेशन’ के मुताबिक, भारतीय पति मौखिक, भावनात्मक और आर्थिक हिंसा का शिकार बन रहे हैं। यह ठीक है कि ऐसे पुरुषों की संख्या पीड़ित स्त्रियों की अपेक्षा बहुत कम हो, लेकिन इस प्रवृत्ति को पूरी तरह अविश्वसनीय नहीं कहा जा सकता। हमेशा ही यह मानकर नहीं चला जा सकता कि पुरुष सदैव शोषक और स्त्री शोषित ही होती है। यह मानवाधिकार के लिहाज से भी गलत है कि किसी गैरजघन्य अपराध के मामले में बिना जांच किए किसी व्यक्ति को सिर्फ एफआईआर के आधार पर गिरफ्तार कर लिया जाए।
समय बदल रहा है और स्त्री-पुरुष के रिश्ते इस बदलाव में अपना संतुलन खोज रहे हैं। यह संतुलन किसी कानून से नहीं कायम किया जा सकता। कानून से रोका भी नहीं जा सकता। यह कानून का मसला है भी नहीं। कानून तो सिर्फ उसके दुरुपयोग की वजह से कठघरे में खड़ा है। ऐसे कानून हमें चाहिए, लेकिन दुरुपयोग न होने की गारंटी के साथ।

शादी के दिन से ही फूट गई बेचारे पति की किस्मत!

शादी के दिन से ही फूट गई बेचारे पति की किस्मत! Source:   Bhaskar News   |   Last Updated 13:18(23/11/11)

 रायपुर/ पलारी। ग्राम खैरा (अमेठी) निवासी दीनदयाल धृतलहरे ने गत रविवार को पुलिस थाने पहुंच पत्नी के अत्याचार से बचाने की मांग की। इस पर पुलिस ने घरेलू मामला होने के कारण पत्नी को थाने बुलाकर अत्याचार न करने की हिदायत दी तथा दोनों को घर वापस भेज दिया। अंचल में यह अपने किस्म का पहला मामला है।
 
आम तौर पर तो पत्नी ही पति के अत्याचार से परेशान रहती हैं। लेकिन ग्राम खैरा का मामला उल्टा है। दीनदयाल पिता संतराम दो बच्चों का पिता है। उसका कहना है कि उसकी किस्मत तो उसी दिन फूट गई थी, जिस दिन उसकी शादी हुई। शादी के बाद उसकी पत्नी के अत्याचार का जो सिलसिला शुरू हुआ वह खत्म ही नहीं हुआ। शुरू में तो लोग हसेंगे सोचकर वह चुप रह जाता था।

  धीरे-धीरे जब सबको पता चल गया तो उसने इसे अपनी नियति मान लिया। जब हद से ज्यादा अत्याचार और जान का खतरा महसूस हुआ तो वह थाने पहुंचा लेकिन पुलिस भी इस मामले में कुछ खास नहीं कर सकती थी, उसने उसे घर तो वापस भेज दिया है, लेकिन दीनदयाल के मन से पत्नी की दहशत तो बनी हुई है। इस घटना की चर्चा नगर सहित आसपास रही।

 

एक पत्नी की घिनोनी करतूत ।

एक पत्नी की घिनोनी करतूत ।

पति को मारने के लिए बुलाए गुंडों ने महिला का गैंग रेप किया ।3 Apr 2012, 1122 hrs IST,टाइम्स न्यूज नेटवर्क    फाल्गुनी बनर्जी।। पोल्बा (हुगली)
एक महिला ने अपने प्रेमी की मदद से कुछ गुंडों को अपने पति के कत्ल की सुपारी दी थी। उन गुंडों ने पति के कत्ल के बाद महिला के साथ गैंग रेप किया। यह घटना कोलकाता से करीब 60 किलोमीटर दूर हुगली में पोल्बा के पटना गांव में घटी।

महिला का 50 साल का पति आलू की खेती करता था और अमीर था। जब वह बाथरूम जाने के लिए उठा, तब उस पर आंगन में हमला हुआ। कातिलों ने उसका गला काट दिया और कई बार चाकू घोंपा। इसके बाद गुंडों ने पूरे घर को इस तरह कर दिया जैसे कि वहां पर डकैती हुई हो। उन्होंने महिला और बेटे को भी बांध दिया। घर से जाने से पहले गुंडों ने महिला के साथ गैंग रेप किया।


39 साल की इस महिला का प्रेमी 25 साल का एक किसान है। प्रेमी ने पुलिस को बताया कि उसने गुंडों को रेप करने से रोकने की बहुत कोशिश की लेकिन गुंडों ने उसे भी बांध दिया था। बेलघरिया, बारानगर और बंदेल से भाड़े के उन गुंडों को प्रेमी ने ही बुलाया था। महिला और उसके प्रेमी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उन दोनों समेत गुंडों को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।


पूरे मामले में पुलिस को महिला की भूमिका पर तब शक हुआ कि जब उसे पता चला कि महिला ने अपनी शिकायत में रेप का जिक्र नहीं किया है, जबकि मेडिकल जांच में इसकी पुष्टि हुई। महिला ने एफआईआर में केवल डकैती और कत्ल का जिक्र किया था।